वो झूठ बोल कर ,झूठ के किले बनाते रहे
अपने हिसाब से सभी के,किरदार गढ़ते रहे
https://ae-pal.com/
जब सामना कराया किरदारों ने,असलियत से
तब सभी किरदारों में,नुक़स ढूंढते फिर रहे।
अपर्णा शर्मा
Sept.22nd,2026
मनमर्जी
दिन ढलते ही
जब बैठता हूँ
पच्छिम की खिड़की
को खोल कर।
https://ae-pal.com/
कहते हैं सभी
और
जानते भी है
कि सूर्यास्त देखना
मेरा पसंदीदा शग़ल है।
https://ae-pal.com/
वो नहीं जानते
मैं आज भी खिड़की
के दूसरी तरफ सिर्फ
तुम्हे ही देखता हूँ
धीरे-धीरे दूर जाते।
अपर्णा शर्मा Sept.18th,2026
अतीत
लौटा नहीं नासमझी का वो निराला वक़्त
समझ आते ही,जो रूठ गया बचपन
और ना ही पलट कर सामने आया
ख्यालों से भरा चपल लड़कपन।
https://ae-pal.com/
लौटे नहीं ,जो कभी थे बेवक्त बिछड़े
स्मृतियाँ से भरी अब वे सिंदूरी शामें
घर के,हर कोने, दालान में समाकर
बसे है निशाँ उन्हीं के अहसासात के।
लौटे नहीं वो शानदार सुनहले दिन
काश की आस में गुजरे स्वप्निल छिन।
जिए थे कभी जो नम दिल के एहसास
सीले पड़े है अफ़सानों के वो पलछिन।
https://ae-pal.com/
लौटता कुछ भी नहीं इस संसार में
जैसे नहीं लौटते समय,नदी और प्यार
कल्पना सागर में तैरता वो खूबसूरत ख़्याल
चाहे हो,अचानक जेहन में,कौंधता विचार।
अपर्णा शर्मा
Sept.11th,2026
